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   اسئلة  مشروعة  في  رواية  خلق  إنسانا للروائية  عنان  رضا المحروس

   اسئلة  مشروعة  في  رواية  خلق  إنسانا للروائية عنان رضا المحروس

   بقلم : محمد صوالحة .

في  البداية  وقبل  الحديث  عن  أي  شيء   فأنا  لست  ناقدا ،  ولا  أقترب  من  هذا  المجال ،     فالنقد  درب  وعر  ولا  يسلكه  إلا   من  كان   عارفا   بخفايا  هذا  الدرب  عالما  بتعرجاته   ولكني  هنا   أطرح  وجهة  نظري  الشخصية  بعد  قراءات  متعددة  لرواية  خلق  إنسانا  للروائية  والقاصة  عنان  رضا  المحروس .
ففي   البداية  وعند  الامساك  بالرواية  وقبل    الولوج  إليها  يلفت  انتباهك  العنوان  (  خُلق إنسانا )” شزوفرينا” .
وهنا   تبدأ  غيمة  الأسئلة  بالهطول  حيث  نبدأ   بالسؤال :
 من  هو  الانسان ؟،  وهل  الإنسانية  صفة    تتعلق  بالبشر أم  هي  صفة   قد  تتمتع  بها    المخلوقات  وإن  كانت  مبنية على  مواقف  ودرجات  متفاوتة؟ .
وإن  كانت  تتعلق  بالكائن  البشري  لِم  لم  تقل  خلق  بشرا  أو  أدميا  .

أم  ترى الانسانية   نعمة  يختص  بها  الله  من يشاء  من  مخلوقاته؟ . 
ثم  يطل  السؤال  الثاني  قبل  معرفة    ما  تحمله  الرواية  من  أحداث  ويتعلق  السؤال  الثاني  بالفصام ”  الشزوفرينيا ”    وهل  هي  حالة  مرضية  نفسية …    ما  هي  أعراضها ؟،  وكيف  لي  أن  أعرف  إن  كنت  ككائن  بشري  أو إنسانا   مصابا  بالفصام ؟.    وما  علاقة  الفصام  بالانسان ؟،   هل هي  علاقة   مع الأدمي  او  الكائن  البشري ،  وهل  من  علاج  لهذا  المرض  أو  هذه  الحال  .
يغرينا  العنوان للولوج  إلى  عالم  الرواية فنجد  أدم  بانتظارنا   وهو   في  سن الأربعين  يكتب  مذكراته أو يستعيدها … للنطلق  معه  من  البدايات  حيث  كان  يعيش  بأسرة أو عائلة  مفككة  يجمعها  سقف ،  فهناك   زوجة  بغاية  القسوة  وعلى  خلاف  طبيعة  المرأة أو الأم  التي  تملك   قلبا   رحيما   حنونا  فنجدها  تتعامل  بمنتهى  العنف   من  الصغار    بدءا  من  الطعام     للتعامل  بالضرب  والحرمان من  أبسط    حقوق  الطفل  ألا  وهو  اللعب ،   مرأة  تبحث   عن  المال  بأي  وسيلة   كانت  ومهما  كانت ،    يشارك  أدم  في  هذا  البيت  الذميم  والجائع ،هذا  البيت  الذي  يقطنه   وحوش  طفلان  اخران  ذكر  وأنثى ،    تستمر  الأحداث  ونستمر  بقراءة  ما  يدونه  أدم  في  مذكراته حتى  تراوده  من  كان  يعتقدها  أخته  أو  شقيقته   سلمى عن  نفسها   لنكتشف  انها  ابنة  ليل ،  أرخصت  جسدها  فتناولته  القطط  وما  زالت  تتناوله،  ليتركه  أدم    وتستمر  الحالة   حتي  يقابل  الباشا  في  الطريق   ويعرض  عليه  أن    يقضي  معه  يوما  بالمقابل ،  ويلتقي أدم بصديقه  في  الحديقة  ليحدثه  بما  جرى  فيقدم  له  النصيحة   بعدم  التعامل  مع  هذه   الشخصية القذرة ،  والتي  يجعلها  المال  تفعل  ما  تشاء  دون  رقيب  أو  حسيب ،   ويذهب  أدم  اليه   .  ليحدث  ما  يحدث  بين  أدم  والباشا   .
وبعد  الانتهاء  من هذا  الفصل  تهب   عاصفة  الأسئلة  من  جديد ؟.
من  هي تلك  المرأة  ( بهية )  التي    جمعت  الأطفال  في  بيتها ؟. ليكونوا  تجارتها  الرابحة     من  هم   ذوي   أدم  الحقيقين ؟.
ما  الذي  قاد زوج  بهية  للرضوخ  لها  والاستسلام  لما  تشتهي   دون  أي  اعتراض؟.
هل  الفساد  فقط   في  الطبقة  الغنية  أم  كل  طبقات  المجتمع  شريكة  بالفساد؟.
كيف  كان  حال  أدم  وهو  يدون  مذكراته   في  ذكرى  ميلاده  الأربعين ؟.
هل  كان  أدم  بكامل  وعيه  وهو  يسرد  تلك  الأحداث ؟.
هل   كانت  الحرب  هي  السبب    في  الحالة  التي  وصل  لها  لبنان   وهذه  الحالة  من  الفساد  المجتمعي  بكل  طبقاته ؟.
هل  الفصام  حالة  أصابت  مجتمعا  كاملا  أم  توقفت  عند  أشخاص ؟.

وهنا  أجدني  أعود  للبديات   خلق  إنسانا   حيث  البيت  الصغير  والحقير  الذي  جمع  بهية    وزوجها    وأدم   وسلمى  التي  كان  يعلم  انها  شقيقته  حتى  كانت  المفاجأه  له  ولنا   حين راودته  عن  نفسها .
وبهية  التي  تخلت    عن كل مشاعر  الانسانية في  سبيسل  الحصول  على المال   حتى  لو  كان  على  حساب  الاطفال  وجسد  الصبية  سلمى .
وهنا يأتي  السؤال :

اي  جيل  سيتخرج  من  هذه  البيئة  التي    كانت  في  واقع  الأمر  تعاني  فصاما  شديدا ؟.
هؤلاء  الأطفال ماذا  سيقدمون لانفسهم   ولبيئتهم ؟ .

اي ظلم  مارسته الحياة  عليهم  اذا  جعلتهم   من  مسؤولية بهية  في  ظل  غياب  الدولة ؟ .
بهية  التي أهملت  زوجها  وبيتها  حتى  مات   هل  كانت راضية  عن نفسها   مطمئن قلبها،؟.
مات  زوج  بهية  فهل  كانت نهايتة  راحة  له ؟.
وعنده   نقف  قليلا  ونتمعن  هذه الاسئلة التي  تثيرها  شخصية  زوج  بهية .
** أي  نوع  من  الرجال  هو ؟.
** لماذا  رضي  بتصرفات  بهية ؟،

**هل  خاف  التشرد  والضياع ،  وهل  من  ضياع اكثر  مما  هو فيه ؟.   وهل  يستحق  ان يقال  عنه  رجل ؟.
ونبقى في  نفس  البيت  وسلمى  وأدم  الذين  ربتهم    بهية  وزوجها
لماذا  راودت   أدم  عن  نفسه وحاولت   جره  إلى  الرذيلة ؟.

ولماذا  امتنع  أدم  عنها بعد  أن  عرف  أنها  ليست  أخته ؟.

هل  هي  الأخلاق  التي  منعته ؟ ،  ومن أين   اتته الاخلاق   وقد اشترك   بتربيته  الشارع  وبهية  سيئة  الخُلق  ؟.
فر  أدم  من  البيت  ووقف على  الإشارات الضوئية   يتسول  المارة ،  حتى   زاره  سوء  الحظ   في  الوقت  الذي  اعتقد  انه  شارف  على  الخلاص  منه  ليمر به  الباشا  ويغويه  ويعرض  عليه  المال ،  فيذهب  للحديقة   ويقابل  صديقة  الذي ينصحه  بعدم  الانجرار  وراء  المال  ،  وحين  اختلف  مع  أدم  غادرة  ولم  يظهر  من  جديد ؟
وهنا  نسأل :  من  هو  هذا  الصديق ؟.
وإن  كان  يرمز  له  بالضمير  الإنساني،  فلماذا  غاب  كل  هذا  الغياب  ولم يعد  ليقدم النصيحة وينذر  النفس  من العواقب ؟ ،  هل  للضمير  الإنساني أن  يموت   بالمطلق ،  ما قيمة  الإنسان  بلا  ضمير ؟.
ثم  ننطلق   ليتعرف  أدم  على  الشيخ  الذي يعلمه  ويربيه  فيحسن  تربيته ويعامله  معاملة الابن  حتى  أكمل  تعليمه  ،  ويرحل  لصيدا  لليلتقي بحبه  والشيخ  يلتقي  بصديقه  ويعملان  معه  في  المطبعة   أو  دار  النشر .
أدم  أحب  مريم ،  ومريم  عشقت  أدم  …  وعلى  اختلاف  الروايات  العربية   التي   في  كثير  من  الأحيان  تحول  الظروف  بين  المحبين وخاصة  إن  اختلفا  بالمعتقد أو الديانة  ،  تم  الزواج .
ويذهب  الشيخ   برفقة  والد  مريم  الى  الجبل  …  ليتوفيا  بحادث .
وهنا  تأتي  الاسئلة  وتثور  من جديد :
لماذا   لم  تفصح   الروائية  عن  سبب  ذاهبهما  سويا  الى الجبل ؟
ومن  ثم توفيا  سويا ،  وجاء الدور  والرسالة التي  حملتها  الكاتبة  على  عاتقها  وهي  التعايش   بحب  وامان   مع  من يختلف  معنا دينيا  او  طائفيا .

أدم  ومريم  في  نهاية  المطاف :
مريم  تكتشف  حقيقة أدم ،    كيف ؟،  وهل  هي  الصدفة التي قادتها  لتتبعه  وتكتشف  أنه  نسخة  مكررة أو  محدثة  عن  الباشا .
هل  كل  أصحاب  المال   يسلكون  نفس  السلوك؟.
أدم  يسقط  حمل  مريم  لأنه  لا يريد  نسخة  مكررة  منه
مريم  تحقد  على  أدم وتخونه مع  ابن  عمها  الدكتور  أيمن .
يتم  ادخال  أدم  مستشفى الأمراض  النفسية  والعصبية
الدكتور  أيمن يسافر  ويعرض  على  مريم  السفر برفقته  والخلاص  من أدم  برحيلها  عنه ؟.   وتأتي   جملة الاسئلة التي  نختم  بها :
لماذا  خانت  مريم أدم  مع ابن  عمها  الذي يبدو  انه  حاقد  على أدم  لان  مريم  فضلته  عليه واختارته ؟
هل  ارادت  الانتقام  من أدم  لانه  كان يخونها   مع  اخرى ؟.
هل    سبب  دخول  أدم   المستشفى  مؤامرة  بين  الدكتور  أيمن  ومريم ؟
هل كان  أدم  صادقا  في كتابة  مذكراته  وخصوصا  انه  كان بكامل  وعيه ؟.
لماذا  بقيت   مريم  مع  أدم هل لتقنع   نفسها بأنها  وفية  للعشرة   وتخفف  من  وجع  الضمير بسبب  خيانتها ، أم  أنها  ما  زالت  تحب  أدم   وأرادت  أن  تطمئن  عليه  وتثبت  لنفسها  ولأدم  والاخرين  أنها  تحمل  الوفاء والإخلاص .
هل  مريم   مصابة  بالفصام ،  لم لم يذكر أدم  ذلك  في  مذكراته ؟.
هي  مجرد  اسئلة   استفزتني  وأنا  اقرأ  خلق  انسانا للروائية  عنان  محروس .
اسئلة    تجبرني  على إعادة  قراءة  الرواية  من  جديد للبحث  عن  إجابات ،  فقط    ما  أتمناه  أن  لا تعترضني  الاسئلة من  جديد .

عن محمد صوالحة

من مواليد ديرعلا ( الصوالحة) عام 1965 شارك في تنظيم وأدارة عدد من المهرجانات والفعاليات الثقافية ، صدر له : كتاب مذكرات مجنون في مدن مجنونة عام 2018 كتاب كلمات مبتورة عام 2019 مؤسس ورئيس تحرير موقع آفاق حرة الثقافي . ومن اعماله المحطوطة : مع سما في أميسا ( رحلة إلى عينيها ) سرد وبكت لونا ( سرد

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